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Cu Chi Tunnel Experience

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  Here’s my travel experience. About 70 km from Ho Chi Minh City, there is a network of Cu Chi tunnels. A Network of   tunnels ?? !!! Yes !!! These numerous tunnels bear witness to a bloody history. During the war with the US, the locals built a network of underground tunnels. Surprisingly the network was spread for about 250 km. The tunnels were so well constructed that they could hold military meetings, enough space for cooking meals, living,storing weapons and what not. The US military was not aware of this. By the time they found out, the damage had been done. This fighting spirit of the   Vietnamese people forced the United States to withdraw from the war. Ten years of war were going on. The unification of North and South Vietnam took place on April 30, 1975, and the city of Saigon was renamed Ho Chi Minh. Today, the place attracts tourists as the ‘Cu Chi Tunnel Complex’. It has the status of a national monument. Experts from all over the world come to st...

Phnom Penh – A City which rose like a Phoenix !!!

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  Have you ever experienced happy as well as depressing thoughts   at the same time while visiting a destination? The capital of Cambodia, Phnom Penh is the place !!! Situated at the confluence of the Tonle Sap, Mekong and Tonle Bassac rivers, this beautiful city was once a major trading center due to its strategic importance. Peeping into the pages of history, the Khmer administration in Angkor was troubled by the constant invasion of enemies located in the neighboring Ayutthaya.   Angkor was not proving very effective geographically for trading. So the Khmer rulers shifted their capital to the central part of the country at the confluence as the site was good for future trade with countries like China, Indonesia. This happened during the fifteenth century. This shifting result was least expected. The temples in Angkor region were completely forgotten in the coming centuries. In the sixteenth century, this country came under the patronage of France. In ...

फ्नॉम पेन्ह - फिनिक्सपेक्षा कमी नाही !!!

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  आपण कधी एकाच ठिकाणी एकाच वेळी आनंद आणि अस्वस्थपणा अनुभवला आहे का ? कंबोडियाची राजधानी फ्नॉम पेन्ह मध्ये आपणास या प्रकारचा अनुभव मिळेल !!!! टोनले सॅप आणि मेकाँग नद्यांच्या संगमावर वसलेले हे सुंदर शहर एकेकाळी तिच्या मोक्याच्या जागेमुळे   एक महत्त्वपूर्ण व्यापार केंद्र होते. इतिहासाच्या पांनांमधून डोकावताना , अंगकोरमधील खमेर प्रशासन शेजारच्या आयुथाया मध्ये असलेल्या शत्रूंच्या सतत स्वारीने अस्वस्थ होते. व्यापारातील वाढ लक्षात घेऊन अंगकोर भौगोलिकदृष्ट्या फार प्रभावी सिद्ध होत नव्हते. आपली नवीन राजधानी म्हणून देशाच्या मध्यभागी असलेल्या या संगमाची जागा चीन , इंडोनेशियासारख्या देशांशी भविष्यातील व्यापारासाठी चांगली राहील. असं लक्षात घेता पंधराव्या शतकात ख्मेर इथे स्थायिक झाले. परंतु यामुळे अंगकोरमधील सर्व मंदिरे पूर्णपणे विसरली गेली. सोळाव्या शतकात हा देश फ्रान्सच्या संरक्षणाखाली आला. एकोणीसाव्या शतकात हेनरी मौहोट मुळे एंगकोर चा पुन्हा शोध लागला . १९५३ मध्ये फ्रान्सपासून स्वातंत्र्य मिळविल्यानंतरही अमेरिका-व्हिएतनाम युद्धाचा प्रतिकूल परिणाम कंबोडियावर झाला. गेल्या...

नोम फेन – किसी फीनिक्स से कम नहीं !!!

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  क्या आपने किसी जगह पर एक ही समय में प्रसन्नता और व्याकुलता को अनुभव किया है ? कंबोडिया   की राजधानी नोम फेन में आपको इस तरह का अनुभव मिलेगा। टॉनले सैप और मेकाँग नदियों के संगम पर बसा यह एक खूबसूरत शहर किसी जमाने में अपने   सामरिक महत्व की वजह से एक बड़ा   व्यापारिक केंद्र था। इतिहास के पन्नों में झाँके तो अंगकोर स्थित खमेर प्रशासन पड़ोसी आयुथया में स्थित   शत्रुओं के निरंतर आक्रमण से परेशान था। व्यापार में बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए भौगोलिक दृष्टि से अंगकोर बहुत कारगर सिद्ध नहीं हो रही थी। अपनी नई राजधानी के रूप में देश के मध्य भाग में स्थित यह संगम स्थल भविष्य में चीन, इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ होने वाले व्यापार के लिए अच्छा था। पंधरवी शताब्दी के बाद अंगकोर छोड़कर खमेर यहाँ आकर बस गये। लेकिन इस वजह से अंगकोर स्थित तमाम मंदिर एकदम भुला दिये   गये। सोलहवीं शताब्दी में जाकर यह देश फ़्रांस के संरक्षण में आया। १९ वी सदी में अंगकोर फ़्रांस के ही एक व्यक्ति ने खोज निकाला।   १९५३ में फ़्रांस से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बावजूद अमरीका-वियतनाम युद्ध का...

नाच उठे संसार !!!

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अभी कुछ महीनों  पहले एक छोटी सी लड़की का डांस करते हुए व्हिडिओ  वायरल हुआ था। राम नवमी या दशहरे के समय, जब पार्श्व संगीत बज रहा है, तो यह बच्ची  सब कुछ भूल कर  नृत्य करती हुई दिखाई देती है। वैसे मैंने यह विडीओ ऊपर दिया है ।आप भी देखकर आनंदित हों !!! मुझे ऐसा लगा की यह लड़की हमें सिखा रही है कि  नृत्य का  सात्विक आनंद कैसे लें । शायद उसकी  उम्र लगभग तीन या चार साल की होगी। खास बात यह है कि जब उसे नाचते हुए देखा गया तो उसके आसपास के लोग भी हंसते हुए  देखे जा सकते  हैं ।  लगभग एक मिनट का यह विडीओ है  नृत्य करते समय इस गुड़िया के चेहरे पर  खुशी स्पष्ट दिखाई  देती है।  मैं इस वीडियो को समय-समय पर देखता हूं....  अच्छा लगता है ।   अब आप YouTube पर इस तरह के बहुत सारे वीडियो देख सकते हैं। कुछ साल पहले, केरल में कॉलेज की लड़कियों ने ' जीमकी  कैमल' गाने पर नृत्य किया और वीडियो बहुत लोकप्रिय हुआ।  उस व्हिडिओ को  नीचे देखें ..  जब से हमारे  फोन में कैमरा लग कर आया है इस तरह के मजेदार दृश्यों...

मेरे स्कूल का किस्सा !!!

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  २३ जून १९८०                               पाँचवी कक्षा की बात है।   स्कूल पहुँचने के बाद पहला घंटा भी पूरा नहीं हुआ था और छुट्टी वाली बेल बजी।   हम सब को   अचरज हो रहा था की अचानक यह क्या हो गया। क्लास टीचर मिस सचदेवा ने कहा की श्री संजय गांधी का निधन हुआ है तो स्कूल को छुट्टी दे दी गई है। लेकिन पहले ‘असेंबली’ मैं दो मिनट का मौन रखा जाएगा फिर आप लोग अपने घर जा सकते हैं। मेरे लिए यह अनुभव आप सब के साथ साझा करना इसलिये महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मुझे कुछ सिखा गया।   हमारी तब उम्र कितनी थी ? ११-१२ साल….किसी की मृत्यु पर हम सभी छात्रों ने दुख जताना लाजमी था। हम राजनीति समझें इतनी परिपक्वता हममें   नहीं थी। लेकिन देश की प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के पुत्र की मृत्यु एक विमान दुर्घटना में हुई है इतना तो हम सब को समझ में आया था। बहरहाल हम सब एक कतार में शांत खड़े रहें ऐसा हमसे कहा गया। सिर्फ हमारी कक्षा ही नहीं पूरे स्कूल के छात्र आंखे बंद कर के शांत खड़े थे। इसके पह...

कृषि पर्यटन – एक अहम कड़ी !!!

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अभी हाल ही में मेरे मित्र के खेत पर मुझे ‘ पोला’ उत्सव करीब से देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।   वह   दिन हमारे खेतों   में   अथक परिश्रम करने वाले बैलों के नाम था। उन्हें नहला कर बढ़िया सजाया गया था। बहुत ही मनमोहक दृश्य था जब सभी बैलों को एक कतार में खड़ा किया गया और उनकी पूजा की गई। प्रसाद ग्रहण करने के उपरांत हम सभी खेत पर टहलने निकले।   उस समय हमारे साथ एक ऐसी जानकार व्यक्ति थी जिसने हमें खेत में उगने वाले कुछ उपेक्षित वनौषधियों से अवगत कराया। करीब-करीब दो   घंटे का समय हमारा उनके साथ जानकारी लेने में गया। कृषि -पर्यटन का इससे अच्छा अनुभव और कोई हो नहीं सकता था।   मेरा उन सभी लोगों से अनुरोध है, जब भी हम किसी खेत पर जाएं तो इन तीन बातों पर आप अवश्य ध्यान दें – १ क्या मुझे यहाँ कुछ अच्छा देखने के लिए   मिला ?   २. क्या मुझे कुछ अच्छा करने के लिए   मिला ? ३. क्या मैं कुछ अच्छा ग्रहण कर पाया ? आम तौर पर शहर में रहने वाले लोग इन बातों को नजरंदाज करेंगे लेकिन कहीं आप एक महत्वपूर्ण कड़ी को ध्यान न देने की   गलती   तो नहीं...